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बदलती दुनिया

  जिस शख़्स में कभी मिला करती थी अब उसकी नज़रो से भी वो जा चुकी पता नहीं कौन थी  एक एहसास थी ? जिसकी मौजूदगी अब ओझल हो चुकी किसी दूसरे शख्स में कभी उसी शख्स में  ढूंढता उसे मैं रहता हु है अगर कही तो बीते कल में या आते सपनों में मगर दूर उससे सदा रहता हु उसी एहसास के लिए मेरा दिल मचलता रहता है नए नए रास्तों की और इशारे करता है जब कभी उस राह पर चालदू  न वो ना उसका एहसास मिलता बस एक चुप्पी सी घेर लेती है की वो अब मेरी हकीकत नहीं जो वो थी शायद अब वो नहीं बदल चुके इस संसार में वो भी बदल चुकी हर्ष ^ ^

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